/riˈflekSHən/ Noun: A calm, lengthy, intent consideration
2320 hrs
As I go to bed tonight, for some reason I feel pretty good. Good enough to reproduce from my 1998 diary something I penned down in Hindi as an 18-year old.2320 hrs
21 May 1998
10.25 PM
शाम ढलती है सुबह होने के लियेदिये जलते हैं रोशनी देने के लिये
साँसे चलती हैं ज़िन्दगी के लिये,
पर क्या दोस्त
बिछड़ते हैं फिर मिलने के लिये?
उस दिन मेरे मन में ख्याल आया,
इतने दिन तड़पकर मैंने क्या पाया?
ढका है मुझपर उम्मीद का साया
कृत्रिम-सी लगती है अब मेरी काया...
तभी चीखकर मेरे हृदय ने गाया,
नहीं चाहिए मुझे यह मोह-माया
मुझको मन की शांति दो
हृदय की एक क्रांति दो
रुह को मेरे सुकून मिले
कुछ कर सकूँ, वो जूनून दो
अन्यथा जीवन निरर्थक है, जीव का अपमान है
जिसमे हो क्षमता मरने की
कुछ करने की, ना डरने की
सिर्फ वही महान है
बाकी सब अज्ञान हैं,
बाकी सब नादान हैं।
~ ©abhi413 / bigbabuleski.blogspot.com
No comments:
Post a Comment